जून में महंगाई ने फिर बढ़ाई चिंता, 4.38% पर पहुंची रिटेल इंफ्लेशन, आलू-अदरक महंगे, सोना-चांदी हुए सस्ते

न्यू दिल्ली : देश में आम आदमी की जेब पर महंगाई का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। जून महीने में खुदरा महंगाई दर यानी रिटेल इंफ्लेशन बढ़कर 4.38 प्रतिशत पर पहुंच गई है। यह लगातार छठा महीना है जब महंगाई में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जनवरी में जहां महंगाई दर केवल 2.74 प्रतिशत थी, वहीं मई में यह बढ़कर 3.93 प्रतिशत हो गई थी और अब जून में यह 4.38 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। खास बात यह है कि जनवरी 2025 के बाद पहली बार महंगाई भारतीय रिजर्व बैंक के 4 प्रतिशत के मिड टारगेट से ऊपर निकल गई है, जिससे आने वाले समय में ब्याज दरों और आर्थिक नीतियों को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार महंगाई बढ़ने की सबसे बड़ी वजह खाने-पीने की वस्तुओं के दामों में तेजी है। जून महीने में फूड इंफ्लेशन बढ़कर 5.32 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि मई में यह 4.38 प्रतिशत थी। आलू, अदरक और कई अन्य जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी ने आम परिवारों के मासिक बजट पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है। रसोई का खर्च बढ़ने से मध्यम और निम्न आय वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहा है।

हालांकि राहत की बात यह रही कि सोना और चांदी की कीमतों में कुछ नरमी देखने को मिली है। इससे निवेशकों और आभूषण खरीदने वाले लोगों को थोड़ी राहत मिल सकती है, लेकिन रोजमर्रा की जरूरतों की बढ़ती कीमतों के सामने यह राहत सीमित मानी जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि खाद्य पदार्थों की कीमतों में जल्द नियंत्रण नहीं हुआ तो आने वाले महीनों में महंगाई और बढ़ सकती है। अब सभी की नजर भारतीय रिजर्व बैंक की अगली मौद्रिक नीति और सरकार के उन कदमों पर रहेगी, जिनसे महंगाई को काबू में लाने की कोशिश की जाएगी। फिलहाल बढ़ती महंगाई ने एक बार फिर आम लोगों की आर्थिक चिंताओं को बढ़ा दिया है।

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